Mantra & Japa
मंत्र एवं नाम-जप
संस्कृत उच्चारण, हिंदी अर्थ और स्पर्श-आधारित 108 मनकों की माला।

साम्ब सदाशिव नाम-जप
शिव
‘साम्ब सदाशिव’ माता अम्बा सहित विराजमान कल्याणकारी शिव का स्मरण है।
Start Japaराधा नाम जप
श्री राधा
श्री राधा के नाम का सहज स्मरण — प्रेम, करुणा और समर्पण को हृदय में जाग्रत करने वाला नाम-जप।
Start Japaॐ — प्रणव
श्री शिव
ॐ तीन लोक, तीन काल और तीन गुणों का मूल नाद है। यह मौन से पहले की ध्वनि है।
Start Japaगायत्री मंत्र
माँ गायत्री
हम उस सवितृ देव के तेज का ध्यान करते हैं, जो तीनों लोकों को धारण करता है। वह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।
Start Japaमहामृत्युंजय मंत्र
श्री शिव
हम त्रिनेत्र शिव की आराधना करते हैं, जो जीवन को सुगंध और पुष्टि देते हैं। जैसे खरबूजा बेल से सहज छूटता है, वैसे ही हमें मृत्यु-भय से मुक्त करें, अमृत से नहीं।
Start Japaगणेश मूल मंत्र
श्री गणेश
ॐ — मूल नाद। गं — गणेश का बीज। गणपतये — गणों के स्वामी को। नमः — नमन।
Start Japaवक्रतुण्ड महाकाय
श्री गणेश
हे वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ सूर्य के समान तेजस्वी देव, मेरे सभी कार्यों में सदा निर्विघ्नता दें।
Start Japaपंचाक्षर मंत्र
शिव
न, म, शि, वा, य — ये पाँच अक्षर पंचभूतों के प्रतीक हैं। शिव को नमन, अपने भीतर के शिव को भी।
Start Japaहरे कृष्ण महामंत्र
श्री कृष्ण
हरि, कृष्ण और राम — तीनों नामों से प्रेम का आह्वान। यह मंत्र माँगता नहीं, पुकारता है।
Start Japaराम नाम
श्री राम
राम नाम को तुलसीदास ने कलियुग का सहारा कहा है।
Start Japaहनुमान बीज मंत्र
श्री हनुमान
पवनपुत्र को नमन। संकट में यह छोटा मंत्र ढाल बनता है।
Start Japaलक्ष्मी बीज मंत्र
माँ लक्ष्मी
श्रीं लक्ष्मी का बीज है। महालक्ष्मी को नमन — धन के साथ शुचिता का भी।
Start Japaदुर्गा बीज मंत्र
माँ दुर्गा
दुं शक्ति का बीज है। दुर्गा को नमन — जो दुर्ग (कष्ट) को पार कराती हैं।
Start Japaसरस्वती बीज मंत्र
माँ सरस्वती
ऐं वाणी और विद्या का बीज है। सरस्वती को नमन।
Start Japaखाटूश्यामजी
खाटू श्याम जी
मैं उन पूज्य, सांवले रंग के भगवान (श्री श्याम देव/खाटू श्याम जी) को बार-बार नमन करता हूँ
Start Japaराधे कृष्ण
श्री कृष्ण
ये भवन के दो स्वरूपो के नाम है , जो राधा है वही कृष्ण है और जो कृष्ण है वही राधा है
Start Japaश्री कृष्ण श्लोक
श्री कृष्ण
वासुदेव के पुत्र, दुखों को हरने वाले, परमात्मा स्वरूप श्रीकृष्ण को हमारा प्रणाम है। जो शरण में आए हुए भक्तों के सभी क्लेशों को नष्ट कर देते हैं, उन गोविन्द को बार-बार नमस्कार है।
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