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मंत्र

श्री गणेश

वक्रतुण्ड महाकाय

हे वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ सूर्य के समान तेजस्वी देव, मेरे सभी कार्यों में सदा निर्विघ्नता दें।

वक्रतुण्ड महाकाय

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

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अर्थ

हे वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ सूर्य के समान तेजस्वी देव, मेरे सभी कार्यों में सदा निर्विघ्नता दें।

साधना-भाव

परीक्षा, यात्रा, व्यापार — हर आरम्भ से पहले पढ़ें।

विधि

एक बार भाव से पर्याप्त; 21 जप विशेष अवसर पर।