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मंत्र
गायत्री मंत्र
हम उस सवितृ देव के तेज का ध्यान करते हैं, जो तीनों लोकों को धारण करता है। वह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।
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अर्थ
हम उस सवितृ देव के तेज का ध्यान करते हैं, जो तीनों लोकों को धारण करता है। वह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे।
साधना-भाव
बुद्धि की शुद्धि, संकल्प की स्पष्टता, दैनिक संध्या का मूल स्तंभ।
विधि
प्रातः सूर्योन्मुख बैठें। हाथ जोड़ें। प्रत्येक जप में अर्थ का स्मरण करें — यह माँग नहीं, प्रार्थना है।