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Festival guide

बुधवार, 29 जुलाई 2026

गुरु पूर्णिमा

Guru Purnima

गुरु, आचार्य, माता-पिता, शिक्षक और ज्ञान-परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व।

रंगोली, तोरण और दीपों की festival illustration

तिथि और मुहूर्त शहर, सूर्योदय और परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। प्रकाशित समय को अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर से मिलाएँ।

महत्व और भाव

गुरु पूर्णिमा क्यों मनाया जाता है?

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह व्यक्ति-पूजा से अधिक उस ज्ञान, अनुशासन और विवेक के प्रति सम्मान का दिन है जो जीवन को दिशा देता है।

प्रमुख कथाएँ और परंपराएँ

अलग क्षेत्रों और सम्प्रदायों में कथाओं का क्रम या विवरण भिन्न हो सकता है। नीचे प्रचलित परंपराओं का सरल परिचय है।

1

वेदव्यास स्मरण

परंपरा में महर्षि वेदव्यास को वेद-विभाजन, पुराण और महाभारत की ज्ञान-धारा से जोड़ा जाता है; इसलिए दिन को व्यास पूर्णिमा कहा जाता है।

2

गुरु-शिष्य परंपरा

भारतीय परंपरा में गुरु केवल सूचना देने वाला नहीं, बल्कि साधना, आचरण और विवेक की दिशा दिखाने वाला माना गया है।

गुरु पूर्णिमा कैसे मनाया जाता है?

1

अपने शिक्षक या मार्गदर्शक को कृतज्ञता संदेश दें।

2

गुरु-वाणी या किसी उपयोगी ग्रंथ का अध्ययन करें।

3

शिक्षा-सहायता या पुस्तक दान करें।

4

गुरु न हों तो ईश्वर, माता-पिता और सद्ग्रंथ को प्रणाम करें।

सरल पूजा विधि

परिवार और सम्प्रदाय की परंपरा को प्राथमिकता दें। यह घर पर की जा सकने वाली सरल मार्गदर्शिका है।

1

कृतज्ञता

जिन लोगों ने जीवन में सही दिशा दी, उनके नाम मन में स्मरण करें।

2

दीप और पुष्प

ज्ञान के प्रतीक रूप में दीप जलाकर पुष्प अर्पित करें।

3

पाठ

गुरु स्तोत्र, एक श्लोक या प्रेरक शिक्षण पढ़ें।

4

आचरण संकल्प

गुरु की एक शिक्षा को अगले 30 दिनों तक व्यवहार में लाने का संकल्प लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेरे कोई दीक्षित गुरु नहीं हैं, तो क्या करूँ?

माता-पिता, शिक्षक, संत-वाणी, ईश्वर और सद्ग्रंथ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं।

गुरु दक्षिणा केवल धन है?

नहीं। सेवा, अध्ययन में निष्ठा, अच्छे आचरण और सीखी बात को जीवन में उतारना भी गुरु-दक्षिणा का रूप है।

संदर्भ

यह लेख सामान्य भक्तिपरक मार्गदर्शन के लिए है। स्थानीय परंपरा, मंदिर और परिवार की विधि अलग हो सकती है।

Last reviewed: 2026-08-29

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