आरती सामान्यतः पूजा या भजन के अंत में की जाती है। दीप को ईश्वर के समक्ष घुमाना भीतर के अज्ञान को प्रकाश में बदलने का प्रतीक है।
सुबह और संध्या दोनों समय आरती की जा सकती है। अग्नि का उपयोग करते समय स्थिर स्थान, बच्चों से दूरी और सुरक्षित दीप-पात्र का ध्यान रखें।