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पूजा विधि

श्री गणेश

गणेश पूजा विधि

शुभारम्भ और गणेश चतुर्थी के लिए सरल षोडशोपचार-आधारित विधि।

गणेश पूजा विधि

Before you begin

पूजा सामग्री

पहले आवश्यक सामग्री तैयार कर लें, फिर नीचे दी गई पूजा विधि के अनुसार पूजा आरम्भ करें।

Samagri checklist

Step-by-step

पूजा विधि

लगभग 35-45 मिनट

गणेश चतुर्थी पर गणेश पूजा की संपूर्ण विधि (सरल और पारंपरिक)
यह विधि घर पर बिना पंडित के भी आसानी से की जा सकती है। श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है।

  1. तैयारी (पूजा से पहले)
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थल (घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा) अच्छी तरह साफ करें।
  • लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
  • कलश में शुद्ध जल भरकर आम के पत्ते, सुपारी, सिक्का रखें और ऊपर नारियल रखें। कलश गणेश जी के दाईं ओर रखें।
  • सभी सामग्री पहले से तैयार रखें।

पूजा में बैठने से पहले आसन शुद्धि, खुद की शुद्धि और आचमन कैसे करें

पूजा शुरू करने से पहले ये तीन काम जरूर करें। इससे शरीर, मन और आसन शुद्ध हो जाता है।

आसन शुद्धि

  • आसन पर बैठने से पहले थोड़ा जल लें।
  • आसन के चारों कोनों पर या पूरे आसन पर जल की बूंदें छिड़कें।
  • यह मंत्र बोलें:
ॐ पृथिवि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥

अर्थ:

हे पृथ्वी माता! तुमने सारे लोकों को धारण किया है, विष्णु भगवान ने भी तुम्हें धारण किया है। हे देवी! तुम मुझे भी धारण करो और इस आसन को पवित्र कर दो।

खुद की शुद्धि (आत्म शुद्धि / पवित्रीकरण)

  • बायें हाथ में थोड़ा जल लें।
  • दाहिने हाथ से जल को ढककर या छिड़कते हुए यह मंत्र बोलें और अपने सिर, शरीर और पूजा सामग्री पर जल छिड़कें:
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

अर्थ:

चाहे कोई अपवित्र हो या पवित्र, किसी भी अवस्था में हो – जो भगवान विष्णु (पुण्डरीकाक्ष) का स्मरण करता है, वह बाहर-भीतर से शुद्ध हो जाता है।

फिर तीन बार बोलें:

ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु। ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु। ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु।

आचमन (तीन बार जल पीना)

आचमन सबसे महत्वपूर्ण है। यह मुँह और शरीर की शुद्धि के लिए किया जाता है।
विधि:

  1. दाहिने हाथ की हथेली में थोड़ा शुद्ध जल लें (आचमनी या चम्मच से)।
  2. तीन बार थोड़ा-थोड़ा जल मुँह में डालकर निगलें (पी लें)।
  3. हर बार एक मंत्र बोलें:
  • पहली बार → ॐ केशवाय नमः (या स्वाहा)
  • दूसरी बार → ॐ नारायणाय नमः
  • तीसरी बार → ॐ माधवाय नमः

4. इसके बाद हाथ धो लें और बोलें:


ॐ हृषीकेशाय नमः (हाथ धोते समय)

ध्यान दें:

  • आचमन करते समय मुख पूर्व, उत्तर या ईशान दिशा की ओर रखें।
  • जल थोड़ा ही लें, ज्यादा न पिएं।
  • आचमन के बाद हाथ धोकर ही आगे की पूजा शुरू करें।

शुभ मुहूर्त में स्थापना (प्राण-प्रतिष्ठा)

  • 2026 में मध्यान्ह मुहूर्त (दोपहर का समय) सबसे शुभ माना जाता है। (अपने शहर का पंचांग देखें, आमतौर पर 11 बजे से 1:30 बजे के आसपास)।
  • चौकी पर थोड़े अक्षत (चावल) बिछाकर गणेश जी की मूर्ति को विराजमान करें।
  • मूर्ति के नेत्रों को अनामिका (अंगूठे के बगल वाली उंगली) से स्पर्श करते हुए मंत्र बोलें:

“ॐ गं गणपतये नमः”
  • हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें (कि आप इतने दिनों तक पूजा करेंगे)।

मुख्य पूजा विधि (षोडशोपचार / सरल क्रम)

  • आवाहन: “ॐ गं गणपतये नमः” बोलकर भगवान को आमंत्रित करें।
  • आसन: फूल अर्पित करके आसन दें।
  • पाद्य-अर्घ्य-आचमन: थोड़ा जल चढ़ाएं (पैर धोने, हाथ धोने और मुंह धोने का प्रतीक)।
  • स्नान (अभिषेक): पंचामृत (दूध + दही + घी + शहद + शक्कर) से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल/गंगाजल से धोएं।
  • वस्त्र और जनेऊ: नया कपड़ा और जनेऊ अर्पित करें।
  • गंध (चंदन-रोली): चंदन, रोली, कुमकुम और सिंदूर का तिलक लगाएं।
  • पुष्प और अक्षत: लाल फूल (गुड़हल सबसे अच्छा) और अक्षत चढ़ाएं।
  • दूर्वा अर्पण (सबसे महत्वपूर्ण): 21 जोड़ी (या 11/7) दूर्वा घास एक-एक करके चरणों में अर्पित करें। मंत्र: “ॐ गणपतये नमः”।
  • धूप-दीप: धूप और घी का दीपक जलाएं।
  • नैवेद्य (भोग): 21 मोदक (या लड्डू), फल, नारियल, पंचमेवा चढ़ाएं।
  • तांबूल: पान-सुपारी अर्पित करें।
  • आरती: गणेश आरती गाएं (जय गणेश जय गणेश…), कपूर जलाएं, घंटी बजाएं।
  • प्रदक्षिणा: तीन बार परिक्रमा करें और प्रणाम करें।
  • क्षमा याचना: कोई गलती हो गई हो तो माफी मांगें।
  • मंत्र जाप - मुख्य मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः (कम से कम 108 बार)
  • गणपति अथर्वशीर्ष या गणेश चालीसा पढ़ सकते हैं।

दैनिक पूजा (स्थापना के बाद)

जब तक मूर्ति घर में रहे (1½, 3, 5, 7 या 11 दिन):

  • सुबह-शाम आरती करें।
  • दूर्वा, फूल, अक्षत और मोदक/फल चढ़ाएं।
  • पूजा स्थल साफ रखें।

विसर्जन

निर्धारित दिन पर फिर से पूजा करके मूर्ति को जल में विसर्जित करें (या प्रतीकात्मक रूप से घर पर)।
किन बातों का विशेष ध्यान रखें

  • दिशा: पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर की ओर रखें। मूर्ति भी पूर्व/उत्तर-पूर्व में रखें।
  • मूर्ति: मिट्टी की या इको-फ्रेंडली लें। प्लास्टर ऑफ पेरिस वाली से बचें।
  • दूर्वा और मोदक जरूर चढ़ाएं – ये गणेश जी को सबसे प्रिय हैं।
  • तुलसी और केतकी फूल न चढ़ाएं।
  • चंद्रमा को चतुर्थी के दिन न देखें (झूठा आरोप लगने का दोष माना जाता है)।
  • भोग में प्याज-लहसुन वाला खाना न चढ़ाएं।
  • मूर्ति को जमीन पर सीधे न रखें।
  • श्रद्धा और शुद्ध मन से पूजा करें – विधि से ज्यादा भक्ति महत्वपूर्ण है।

समापन

1. क्षमा याचना अवश्य करें
हाथ जोड़कर बोलें:
“हे गणेश जी! जानबूझकर या अनजाने में जो भी कमी, त्रुटि या अशुद्धि हुई हो, उसे क्षमा करें। मेरी पूजा स्वीकार करें।” 2. प्रसाद ग्रहण करें
नैवेद्य का प्रसाद परिवार के साथ बाँटें। पहले खुद थोड़ा ग्रहण करें, फिर दूसरों को दें। 3. आरती के बाद
आरती की थाली में जल डालकर माथे पर लगाएँ और थोड़ा पानी पी लें। 4. पूजा सामग्री • फूल, दूर्वा, अक्षत आदि को साफ जगह पर रखें या नदी/पेड़ के नीचे छोड़ दें। • पंचामृत और जल को पौधों में डाल सकते हैं। 5. प्रणाम
अंत में तीन बार प्रणाम करके पूजा समाप्त करें।

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