राधा नाम का जप केवल ध्वनि दोहराना नहीं, प्रेम को अपने व्यवहार में उतारने का स्मरण भी है। नाम लेते समय मन में कोमलता, सेवा और अहंकार-त्याग का भाव रखा जा सकता है।
जप के बाद एक छोटा संकल्प करें—आज किसी एक व्यक्ति से अधिक धैर्य और करुणा से बात करेंगे। इस प्रकार नाम दैनिक जीवन में जीवित रहता है।
