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सोमवार, 14 सितंबर 2026

गणेश चतुर्थी

Ganesh Chaturthi

विघ्नहर्ता और बुद्धि के देव श्रीगणेश का जन्मोत्सव—स्थापना, मोदक, दूर्वा, आरती और पर्यावरण-सम्मत विसर्जन।

गणेश चतुर्थी

तिथि और मुहूर्त शहर, सूर्योदय और परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। प्रकाशित समय को अपने स्थानीय पंचांग या मंदिर से मिलाएँ।

महत्व और भाव

गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता है?

गणेश चतुर्थी नए आरंभ में विनम्रता, विवेक और बाधाओं को सीख में बदलने का संदेश देती है। उत्सव की अवधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार 1.5, 3, 5, 7 या 10 दिन हो सकती है।

प्रमुख कथाएँ और परंपराएँ

अलग क्षेत्रों और सम्प्रदायों में कथाओं का क्रम या विवरण भिन्न हो सकता है। नीचे प्रचलित परंपराओं का सरल परिचय है।

1

पार्वती द्वारा गणेश की रचना

लोकप्रिय पुराण-कथा में देवी पार्वती अपने उबटन से बालक गणेश की रचना करती हैं और द्वार-रक्षा का दायित्व देती हैं। आगे शिव द्वारा हाथी-मस्तक प्रदान किया जाता है। कथा आज्ञा, संबंध और पुनर्जन्म का प्रतीक मानी जाती है।

2

प्रथम-पूज्य बनने की कथा

एक लोकप्रिय कथा में गणेश अपने माता-पिता की परिक्रमा को ही संसार की परिक्रमा मानते हैं। इससे बुद्धि, माता-पिता के सम्मान और सार समझने का संदेश मिलता है।

गणेश चतुर्थी कैसे मनाया जाता है?

1

मिट्टी या पुन: उपयोग योग्य प्रतिमा चुनें; प्लास्टर और विषैले रंग से बचें।

2

घर में स्थापना अवधि अपनी क्षमता के अनुसार रखें।

3

प्रातः/सायं आरती, मोदक और दूर्वा अर्पण करें।

4

विसर्जन घर के पात्र या निर्धारित कृत्रिम टैंक में करें।

सरल पूजा विधि

परिवार और सम्प्रदाय की परंपरा को प्राथमिकता दें। यह घर पर की जा सकने वाली सरल मार्गदर्शिका है।

1

स्थापना

स्वच्छ चौकी पर प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और संकल्प लें।

2

आवाहन

गणेश मंत्र से बुद्धि, विनम्रता और विघ्न-निवारण की प्रार्थना करें।

3

दूर्वा और नैवेद्य

दूर्वा, पुष्प और मोदक/फल अर्पित करें।

4

आरती

गणेश आरती पढ़ें और परिवार के साथ प्रसाद लें।

5

उत्तर-पूजा और विसर्जन

निर्धारित दिन कृतज्ञता से विदाई दें और पर्यावरण-सम्मत विसर्जन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणेश स्थापना कितने दिन की होनी चाहिए?

यह परिवार और क्षेत्रीय परंपरा पर निर्भर है। एक दिन से 10 दिन तक विभिन्न प्रचलन हैं।

क्या घर में विसर्जन किया जा सकता है?

हाँ, छोटी मिट्टी की प्रतिमा को स्वच्छ पात्र में विसर्जित कर वही मिट्टी पौधों में दी जा सकती है।

संदर्भ

यह लेख सामान्य भक्तिपरक मार्गदर्शन के लिए है। स्थानीय परंपरा, मंदिर और परिवार की विधि अलग हो सकती है।

Last reviewed: 2026-08-29

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