श्री कृष्ण श्लोक
वासुदेव के पुत्र, दुखों को हरने वाले, परमात्मा स्वरूप श्रीकृष्ण को हमारा प्रणाम है। जो शरण में आए हुए भक्तों के सभी क्लेशों को नष्ट कर देते हैं, उन गोविन्द को बार-बार नमस्कार है।

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः॥
Rounds complete: 0
अर्थ
वासुदेव के पुत्र, दुखों को हरने वाले, परमात्मा स्वरूप श्रीकृष्ण को हमारा प्रणाम है। जो शरण में आए हुए भक्तों के सभी क्लेशों को नष्ट कर देते हैं, उन गोविन्द को बार-बार नमस्कार है।
साधना-भाव
इस एक श्लोक में सम्पूर्ण भागवत समाई है यह कोई साधारण श्लोक नहीं है, यह साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का हृदय है। हर क्लेश का नाश करता है। अगर आपको इसका चमत्कार देखना है तो करके देखिये - कुछ ही दिनों में आप देखेंगे - आपके बिगड़े काम बनने लगे हैं, घर में शांति आने लगी है, और मन के अंदर एक अजीब सी शक्ति आ गई है। क्योंकि जहाँ कृष्ण नाम है, वहाँ डर, दुःख और दरिद्रता कभी ठहर ही नहीं सकते। जय श्री कृष्ण!