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84 पद
श्रीहित चौरासी
श्रीहित हरिवंश महाप्रभु की 84 पदों वाली ब्रजभाषा पदावली — मंगलाचरण, राग-सूचना और पढ़ने की प्रगति के साथ।

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आरम्भ
मंगलाचरण
निगम अगोचर बात कहा कहौं अतिहि अनौखी।
उभय मीत की प्रीति-रीति चोखी ते चोखी॥
वृन्दावन छबि देखि-देखि, हुलसत हुलसावत।
जल-तरंगवत् गौर-श्याम विलसत विलसावत॥
ललितादिक निज सहचरी, निरखि निरखि बलि जात नित।
चौरासी हित पद कहे, चतुरन कौ यह परम वित॥
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