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आरती

श्री विष्णु

ॐ जय जगदीश हरे

भगवान् जगदीश्वर/सत्यनारायण जी की आरती

सत्यनारायण कथा के अंत में, या नित्य संध्या।

ॐ जय जगदीश हरे
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ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे । भक्त जनोंके संकट, क्षण में दूर करे ॥

जगदीश हरि की जय। भक्तों के संकट क्षण में दूर करते हैं।

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